क्या ऑटोफ्लावर वर्थ हैं?
- 1. ऑटोफ्लावर के फायदे
- 1. a. स्टेल्थ ग्रो में मददगार
- 1. b. जल्दी बढ़ते हैं
- 1. c. लगातार हार्वेस्ट
- 1. d. फोटोपिरियड बदलने की ज़रूरत नहीं
- 1. e. अपने स्पेस का अधिकतम इस्तेमाल दें
- 2. ऑटोफ्लावर के नुकसान
- 2. a. यील्ड
- 2. b. क्लोनिंग काम नहीं करती
- 3. निष्कर्ष
बहुत से लोग क्योंकि उन्हें इसमें जुनून है, इसलिए कैनबिस उगाते हैं, लेकिन एक समय ऐसा आता है जब आपको सोचना पड़ता है कि क्या वाकई ये सारी मेहनत जरूरी है। ऑटोफ्लावर पिछले कुछ सालों में बहुत प्रसिद्ध हो गए हैं, लेकिन कुछ लोग सोचते हैं कि क्या ऑटोफ्लावर वाकई में वर्थ हैं। अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो यह लेख आपको ऑटोफ्लावर के फायदे समझने में मदद करेगा। अगर आपको ऑटोफ्लावर के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं है, तो इतना समझ लीजिए कि यह कैनबिस की वह किस्म है जो बढ़ने और फ्लावरिंग के लिए मौसम पर निर्भर नहीं रहती। कुछ समय बढ़ने के बाद यह अपने आप फ्लावरिंग शुरू कर देती है। मतलब, ये पौधे अपनी उम्र के हिसाब से फूलते हैं, न कि मौसम बदलने के इंतज़ार में। इसी वजह से इन्हें “ऑटो” कहा जाता है। ये तेज़ हैं और अच्छा यील्ड देती हैं – जो आपको जरूर ध्यान में रखना चाहिए, चाहे आप कमर्शियल ग्रोअर हों। लेकिन, सबसे पहले, ये जानने से पहले कि क्या यह मेहनत के लायक है, आपको इसके फायदे और नुकसान समझने होंगे।
यह आपको चीजों को समझने और फैसला लेने में मदद करेगा। ध्यान दें कि यह तुलना फोटोपीरियड या रेगुलर कैनबिस पौधों और ऑटोफ्लावर के बीच है। इसलिए, अगर आप अभी पारंपरिक कैनबिस किस्में उगा रहे हैं, तो यह तुलना आपकी मदद करेगी यह समझने में कि क्या आप ऑटोफ्लावर भी उगा सकते हैं। एक स्वस्थ और उत्पादक कैनबिस पौधा उगाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। आपको अपने पौधों की पानी, रोशनी और पोषक तत्वों की आवश्यकताओं को पूरा करना पड़ता है। अगर आप इंडोर ग्रो कर रहे हैं, तो आपको अपने स्पेस के लिए ग्रो टेंट, हेल्दी पौधों को उगाने के लिए पर्याप्त ताकतवर लाइट्स, और अच्छे वेंटिलेशन के उपकरण भी खरीदने होंगे, जिससे ताजी हवा का आना-जाना और तेज़ गंध देने वाले टरपीन की खुशबू का बाहर जाना संभव हो सके। इसके अलावा, आपको अपने पौधों की हाइड्रेशन, ग्रोइंग मीडियम के pH लेवल, और कीड़े-मकोड़े या बीमारियों के किसी भी लक्षण को देखने के लिए काफी समय लगाना पड़ता है। इसका मतलब है कि आपको हर दिन अपने पौधों के करीब रहना पड़ता है। अगर आपके पास ऑटोमेटेड सिस्टम नहीं है तो यदि आप कुछ दिनों के लिए बाहर जाना चाहें तो आपको अपने पौधों की देखभाल के लिए किसी को ढूँढना पड़ेगा। तो इतनी मेहनत के बाद, क्या ऑटोफ्लावरिंग कैनबिस पौधे उगाना वाकई वर्थ है?
1. ऑटोफ्लावर के फायदे
स्टेल्थ ग्रो में मददगार
ऑटो छोटे और कॉम्पैक्ट होते हैं। सभी नहीं, लेकिन कुछ तो वाकई बहुत छोटे होते हैं। उदाहरण के लिए, आप Mimosa Cake Auto जैसी स्ट्रेन को अच्छी ट्रेनिंग देकर अपनी अलमारी में भी उगा सकते हैं। ज्यादातर ऑटो 4-5 फीट तक ही बढ़ते हैं, जो छोटे ग्रो रूम में आसानी से संभाले जा सकते हैं। बाहर उगाएं तो ये ज्यादा बढ़ते हैं, फिर भी दूसरी कैनबिस किस्मों से छोटे ही रहते हैं, इसलिए छुपकर उगाने वालों के लिए ये एकदम परफेक्ट हैं।
यह जानकर हैरानी नहीं होगी कि दुनियाभर के बहुत से देशों में कैनबिस अब भी बैन है। हालाँकि कुछ देशों ने लीगल बनाने और आसान ग्रोइंग कानून लागू कर दिए हैं, बाकी अभी भी बहुत पीछे हैं। ऐसी जगहों पर छोटे ऑटोफ्लावर ग्रोअर के लिए आकर्षक होते हैं क्योंकि इनसे वे अपनी बागवानी की हॉबी छिपा सकते हैं, चाहे इंडोर हो या आउटडोर।
इंडोर ग्रोइंग आमतौर पर ज्यादा सीक्रेट रखती है। ग्रोअर जेनेटिकली छोटे ऑटोफ्लावरिंग किस्मों को छोटे ग्रो टेंट या फिट किए गए कबर्ड्स में उगा सकते हैं। छुपाने के लिए कुछ ग्रोअर तो बकेट्स और कंप्यूटर टावर में लाइट और फैन लगाकर ऑटो उगाते हैं ताकि पकड़े न जाएं।
इंडोर ग्रोअर अपने पौधों के साइज मैनेज करने के लिए भी कई स्टेप्स ले सकते हैं। लो-स्ट्रेस ट्रेनिंग जैसी तकनीकों में पौधों की टॉप शाखाओं को कंटेनर के किनारे बांधा जाता है। इससे साइड ब्रांचेज़ ऊपर की ओर बढ़ती हैं और पौधे छोटे-चौड़े बनते हैं। कंटेनर का साइज भी पौधे के साइज में फर्क डालता है। छोटा कंटेनर – छोटी जड़ें – छोटा पौधा। 5L जितना छोटा कंटेनर, एक छोटा पौधा देता है – स्टेल्थ पसंद करने वालों के लिए एकदम बढ़िया। हां, इससे यील्ड कम हो जाएगी, पर उस रिस्क में पकड़े जाने के चांस भी घटेंगे।
जहाँ इंडोर ग्रोइंग स्मेल को कंट्रोल करने में कारगर है, वहीं बहुत से आउटडोर ग्रोअर गुरिल्ला ग्रोइंग का फायदा उठा रहे हैं – यानी, जंगल के किनारे या घास के मैदान जैसी जगहों पर छुपकर उगाना। ऑटोफ्लावरिंग किस्में इसके लिए परफेक्ट हैं। इनकी छोटी साइज इन्हें झाड़ियों में छुपा लेती है और मजबूत जीन इन्हें मौसम की मार झेलने लायक बनाती है। बड़े गार्डन वाले ग्रोअर्स के लिए भी ये आदर्श हैं। हाँ, इनकी स्मेल होगी, पर बाकी पौधों के बीच में ये आसानी से घुल मिल जाती हैं। साथ में तुलसी, टमाटर आदि खुशबूदार पौधे लगा दें, तो टरपीन की स्मेल भी काफी हद तक कवर हो जाएगी। लेकिन आपको कहीं दूर गुरिल्ला ग्रो सेटअप करने की जरूरत नहीं, घर भी स्टेल्थ तरीके से ऑटोफ्लावर उगा सकते हैं।
कई ग्रोअर अपने बैकयार्ड में अलग-अलग पौधों के साथ ऑटोफ्लावर लगाकर छुपा लेते हैं। पॉलीटनेल्स में उगाने से भी जिज्ञासु निगाहों से बच सकते हैं। और विभिन्न हर्ब्स व सब्जियों के साथ कैमोफ्लाज करें। अगर आप घना लिविंग मल्च लगा दें, जैसे कि रेड क्लोवर, तो आपकी कैनबिस स्ट्रेन का पता ही नहीं चलेगा। इस स्ट्रेटेजी से न सिर्फ आपके कीमती पौधे छिपेंगे, बल्कि पूरे सीजन में खाने-पीने के पौधों की भी फसल मिलेगी। सचमुच, डबल फायदा!
दरअसल ऑटोफ्लावर रूडरैलिस स्पीशीज के होते हैं, जो Sativa और Indica के मुकाबले सामान्यतः काफी छोटे होते हैं। जेनेटिकली ही ये बड़े नहीं होते। लेकिन ब्रीडर्स ने रूडरैलिस को सैटिवा और इंडिका के साथ क्रॉस-पोलिनेट करके आज के ऑटो तैयार किए हैं। अब पौधे छोटे हैं, परफॉर्मेंस बढ़िया है। सभी कैनबिस वेरायटीज़ एक ही प्रजाति 'Cannabis sativa L.' के अन्तर्गत आती हैं। हाइट और पत्तों के शेप में फर्क होते हुए भी सबका जेनेटिक ओरिजिन एक ही है, जिससे इन्हें इंटरब्रीड करना संभव है। यानी, ये सभी एक ही पौधे की सबस्पीशीज हैं।
जल्दी बढ़ते हैं
ऑटोफ्लावर जितने जल्द हो सकते हैं, उतने जल्दी पूरे साइकिल कंप्लीट करते हैं। अधिकतर ऑटो 10-11 हफ्तों में वेजिटेटिव और फ्लावरिंग समेत पूरी लाइफ साइकल पूरी कर लेते हैं। इससे तेज और कोई नहीं। ज्यादातर ग्रोअर को कैनबिस उगाना पसंद है, मगर बहुत लोग पांच महीने यानी 20 हफ्ते तक इंतजार नहीं कर सकते। अगर आप भी ऐसे ग्रोअर हैं, तो ऑटोफ्लावर आपके लिए ही बने हैं।

पर आखिर क्यों ऑटोफ्लावरिंग पौधे फोटोपीरियड किस्मों से इतने ज्यादा तेज होते हैं? यह सब नेचुरल सेलेक्शन और जेनेटिक म्यूटेशन के कारण होता है। कैनबिस की उत्पत्ति मध्य एशिया में हुई थी, फिर प्राकृतिक फैलाव के जरिए पूरी दुनिया में फैल गई। इनमें से कुछ नस्लें ऐसे उत्तरी इलाकों (जैसे साइबेरिया) में पहुंचीं, जहाँ ग्रोइंग सीजन छोटा था। ऐसे में इन पौधों के पास बीज बनने और फैलने के लिए कम वक्त होता था। जो पौधे देर से बड़े होते थे वे बाहर हो गए, और जो तेज-बड़े, वे बच गए।
आखिरकार, इन पौधों में उम्र के आधार पर फ्लावरिंग करने की खूबी विकसित हुई – यानी, सिजनल लाइट की जगह अपने इंटरनल क्लॉक से फ्लावरिंग की। इसके अलावा, इनकी आइडेंटिटी अलग होने लगी, जिससे इन्हें Cannabis ruderalis सबस्पीशीज में डाला गया। बाद में ब्रीडर्स ने उन्हें फोटोपीरियड वेरायटीज़ से क्रॉस किया, और आज के ऑटोफ्लावर हाइब्रिड मिल गए, जिनमें रैपिड ग्रोथ, जबर्दस्त यील्ड और बढ़िया कैनाबिनॉयड प्रोफाइल मिलती है।
लगातार हार्वेस्ट
रेगुलर कैनबिस वेरायटीज़ की सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये है कि आप साल में सिर्फ दो बार ही हार्वेस्ट ले सकते हैं। कितनी भी प्लानिंग और एफर्ट्स कर लें, फोटोपिरियड पर निर्भर होने के कारण इससे ज्यादा नहीं। हां, इंडोर में लाइट चेंज कर सकते हैं, लेकिन वार्षिक चक्र वही रहेगा।
मगर ऑटोफ्लावरिंग के साथ ये रोक नहीं है। क्योंकि आप इन्हें सिर्फ 11-12 हफ्तों यानी लगभग 3 महीने में हार्वेस्ट कर सकते हैं, तो लगातार हार्वेस्ट की खास सुविधा मिलती है। इसके अलावा, रेगुलर पौधों के साथ आप ग्रो स्पेस में दूसरी पौधे नहीं रख सकते क्योंकि फ्लावरिंग स्टेज में लाइट साइकल अलग चाहिए।
लेकिन, ऑटोफ्लावर में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। हर उम्र के पौधे एक ही ग्रो रूम में रख सकते हैं और अधिक से अधिक फायदा उठा सकते हैं। यानी आप जितने चाहे बड्स हार्वेस्ट कर सकते हैं – बिना लाइट, ग्रोथ साइकिल का ध्यान रहे।
फोटोपिरियड बदलने की ज़रूरत नहीं
यह ऑटोफ्लॉवर का सबसे बड़ा फायदा है। फोटोपिरियड प्लांट्स को ढेर सारी देखभाल चाहिए। वे वेजिटेटिव स्टेज में तब तक बने रहते हैं, जब तक उन्हें 18 घंटे की रौशनी मिलती रहे। जैसे ही आप लाइट साइकल बदलकर 12 घंटे कर देते हैं, वे फ्लावरिंग करने लगते हैं।

अगर आप बाहर उगा रहे हैं, तो आपको सीजनल बदलाव के हिसाब से बीज लगाकर सबकुछ प्लान करना पड़ेगा। और अगर इंडोर उगा रहे हैं, तो लाइटिंग चेंज करनी होगी। यह न सही किया तो पौधे ठीक से नहीं बढेंगे। हल्की सी लाइट लीक भी परेशान करेगी।
मगर ऑटोफ्लावर अपनी उम्र के मुताबिक ही बढ़ते हैं। जैसे ही पौधा एक ख़ास उम्र पर पहुंचता है, अपने आप फ्लावरिंग शुरू होती है। इसमें कोई छेड़छाड़ की जरूरत नहीं। आप 24 या 12 घंटे रोशनी दें, पौधा अपना लाइफ साइकल वैसे ही रहेगा। हाँ, जितनी ज्यादा लाइट, उतनी ज्यादा ग्रोथ, मगर लाइफ साइकल पर फर्क नहीं। ऑटो को आप इन लाइट साइकल्स पर उगा सकते हैं:
- 12/12
- 18/6
- 20/4
पर जितना ज्यादा देंगे, उतना पाएंगे, इसलिए जब जरूरत न हो तब 12/12 पर न ugayen। इंडोर में भले ज्यादा फर्क न दिखे, मगर फोटोपिरियड बदलने का झंझट न होना बीज से नई शुरुआत करने वालों के लिए ऑटो को बहुत आसान बनाता है। नए लोग लाइट साइकल कब बदलें, लाइट लीक इत्यादि की टेंशन छोड़कर एन्जॉय कर सकते हैं।
अपने स्पेस का अधिकतम इस्तेमाल दें
क्योंकि ऑटो छोटे होते हैं, आप एक ही कमरे में कई पौधे रख सकते हैं। हद से ज्यादा न भरेें। अगर ठीक से प्लान करें तो अपने स्पेस का 100% इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे छोटे स्पेस में बड़े पैमाने पर यील्ड बढ़ाने के ज्यादा चांस मिलते हैं। ज्यादातर लोग ऑटोफ्लावरिंग कैनबिस स्ट्रेन उगाते हैं क्योंकि वो सिटी अपार्टमेंट या छोटे घरों में रहते हैं। इन जगहों पर स्पेस कम होता है। शुक्र है, आप ऑटो आसानी से कपबोर्ड या छोटी अलमारी में भी उगा सकते हैं। छोटे स्पेस में कई पौधे उगाने के लिए खास तकनीकें भी हैं। जैसे ScrOG का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे काफी अच्छे यील्ड्स मिल सकते हैं।
2. ऑटोफ्लावर के नुकसान
यील्ड
चूंकि ऑटोफ्लावर रेगुलर कैनबिस स्ट्रेन के मुकाबले छोटे होते हैं, इसलिए उनकी यील्ड भी कम होती है। लेकिन सच ये है कि जितने स्पेस में एक फोटोपीरियड पौधा उगता है, उसी में आप दो ऑटोफ्लावरिंग स्ट्रेन भी उगा सकते हैं। दोनों की यील्ड लगभग बराबर हो जाती है। इसलिए इसको नुकसान नहीं कह सकते। लेकिन, अगर आप एक ऑटोफ्लावरिंग पौधे को किसी एक फोटोपीरियड स्ट्रेन से कंपेयर करें, तो ऑटो की यील्ड थोड़ी कम होगी। दरअसल ये सब जेनेटिक्स पर निर्भर है। मॉडर्न ऑटोफ्लावरिंग हाइब्रिड्स में रूडरैलिस जीन के कारण पौधे छोटे रहते हैं। यह छोटी जगह में बहुत काम आता है, लेकिन अभी भी छोटे पौधों की यील्ड लंबे पौधों से कम होती है। भले ही ऑटोफ्लावरिंग स्ट्रेन वेट में भारी सैटिवा-डॉमिनेंट पौधों जैसी बडी बड्स न दें, लेकिन अब नए ब्रीडर्स ने काफी ज्यादा यील्डिंग स्ट्रेन भी बना दी हैं। और भविष्य में ये और बढ़ने वाला है।
क्लोनिंग काम नहीं करती
कमर्शियल ग्रोअर बीज खरीदने में रुचि नहीं रखते क्योंकि वे अपनी पसंदीदा स्ट्रेन की क्लोनिंग करते हैं। क्लोनिंग से कई बड़े फायदे मिलते हैं - बीज अंकुराने और वेजिटेटिव स्टेज में जाने का समय बचता है, और सटीक जेनेटिक कॉपी मिलती है। अगर आपको कोई पौधा अपनी मनपसंद क्वालिटी का मिले, तो आप उसे बार-बार क्लोन करके लगातार वैसा ही पौधा पा सकते हैं। पर्यावरण के फर्क के कारण हल्का सा ग्रोथ में अंतर हो सकता है, लेकिन ऊँचाई, वजन और फाइटोकेमिकल प्रोफाइल लगभग वही मिलती है।
दो ग्रो रूम सेटअप कर के, क्लोन किए पौधों को एक रूम में और मदर प्लांट्स को दूसरे रूम में रखा जाता है। कमर्शियल ग्रोअर्स के लिए यह संभव है, साथ में जगह भी चाहिए। छोटे ग्रोअर्स के लिए यह मुश्किल हो सकता है।

ऑटोफ्लावरिंग पौधों की क्लोनिंग की जाए तो भी, छोटे-छोटे पौधे बनते हैं और यील्ड बहुत ही कम होती है। यह इसलिए क्योंकि ऑटो अपनी उम्र के आधार पर बढ़ते हैं। अगर आप 30वें दिन क्लोन लेंगे, तो उसका क्लोन भी उसी उम्र का होगा और बढ़ने का समय नहीं मिल पाएगा। इसलिए वे पौधे पतले-दुबले ही रह जाते हैं। क्लोनिंग मुमकिन है, लेकिन वक़्त की बर्बादी है।
इस समस्या से बचने के लिए अधिकतर कमर्शियल ग्रोअर दो अलग या एक जैसी ऑटोफ्लावरिंग स्ट्रेन को पोलिनेट करके बीज तैयार करते हैं। इससे टाइम और पैसे की बचत होती है। फोटोपिरियड का क्लोनिंग अच्छा आईडिया है, लेकिन इसमें वक़्त ज्यादा लगता है। बेहतर यही है कि आप ऑटोफ्लावर जल्दी से ग्रो और हार्वेस्ट कर लें।
तो क्या ऑटोफ्लावर वाकई वर्थ हैं? आप क्या सोचते हैं? बस एक नुकसान की क्लोनिंग से यील्ड कम मिलती है, बाकी में ये फोटोपीरियड स्ट्रेन से बेहतर भी हैं। सबसे बड़ी बात, समय की बचत होती है। और अगर “समय ही पैसा है” इस बात पर अमल करें, तो ऑटोफ्लावर वाकई वर्थ हैं!
3. निष्कर्ष
तो क्या ऑटोफ्लावर वाकई वर्थ हैं? आप क्या सोचते हैं? क्लोनिंग से कम यील्ड के नुकसान को छोड़ दें तो ये बाकी कई मामलों में फोटोपीरियड स्ट्रेन जितना ही बढ़िया हैं, बल्कि कई जगह बेहतर भी हैं। सबसे खास बात यह है कि ऑटोफ्लावर ग्रो करके आप बहुत समय बचाते हैं। और अगर आप मानें कि “समय ही पैसा है” तो आपको भी समझ में आ जाएगा कि ऑटोफ्लावर सचमुच वर्थ हैं!
ऑटोफ्लावर निश्चय ही आपको फायदा देंगे, खासकर अगर आप कम जगह, कम पानी, कम लाइट और कम न्यूट्रिएंट्स में क्वालिटी बड्स जल्दी पाना चाहते हैं। ऑटोफ्लावर हर ग्रो साइकल में औसतन 30% वक्त बचाते हैं, जिससे आप एक साल में चार बार तक ग्रो कर सकते हैं। लेकिन एक बात हमेशा याद रखें – इसके सारे फायदे पाने के लिए शुरुआत हाई-क्वालिटी और मजबूत जेनेटिक्स से करनी चाहिए। अच्छी ऑटो जेनेटिक्स से किसी भी दिक्कत से बचेंगे और ये फायदे मिलेंगे:
| ऑटोफ्लावरिंग स्ट्रेन के फायदे | |
|---|---|
| बीज से हार्वेस्ट सिर्फ 8 हफ्तों में | कम स्पेस में भी वही यील्ड |
| 1 ही ग्रो टेंट में लगातार हार्वेस्ट | पानी और न्यूट्रिएंट्स की बचत |
| फ्लावरिंग के लिए लाइट साइकल बदलने की जरूरत नहीं | ऑटो कठिन जलवायु में भी आसानी से बढ़ते हैं |
तो अगर आप टॉप-क्वालिटी ऑटोफ्लावर ग्रो करना चाहते हैं, तो अच्छी रेप्युटेशन वाली सीड बैंक से ही ऑर्डर करें और क्लाइंट रिव्यूज भी जरूर देखें जो जेनेटिक्स को वेरिफाई करें। Fast Buds के पास 50+ ऑटोफ्लावरिंग स्ट्रेन का कैटलॉग है, जिसमें इंडोर, आउटडोर और ग्रीनहाउस, सभी ग्रोअर्स के लिए बढ़िया किस्में उपलब्ध हैं ताकि आपको जल्दी से प्रीमियम क्वालिटी वीड मिल सके! अगर आप नए हैं और पहली बार ऑटो ग्रो कर रहे हैं, तो हमारी सपोर्ट टीम से संपर्क करें – हम खरीद से हार्वेस्ट तक आपकी पूरी मदद करेंगे।
अगर आपने पहले ऑटोफ्लावर ग्रो किए हैं, तो अपने अनुभव नीचे कमेंट सेक्शन में बताकर दूसरे ग्रोअर्स की मदद करें!
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