वर्चुअल रियलिटी हाई: भांग के उपयोग और VR अनुभवों के बीच संवाद
- 1. वर्चुअल रियलिटी का विकास
- 2. गांजा का सेवन: ट्रेंड्स और प्रभाव
- 3. वर्चुअल रियलिटी में गांजा और संवेदना
- 4. गांजा के साथ vr का आनंद बढ़ाना
- 5. चिकित्सकीय संभावना: गांजा-सहायित वर्चुअल रियलिटी
- 6. विचारणाएँ और चिंताएँ
- 7. निष्कर्ष
पिछले कुछ वर्षों में वर्चुअल रियलिटी के विस्तार और भांग के सेवन की सामान्यीकरण ने शोधकर्ताओं को इनकी संवेदनाओं और अनुभवों पर मिलकर होने वाले प्रभावों की संभावनाओं की कल्पना करने पर मजबूर कर दिया है, और यह सोचने पर कि कैसे इन्हें हमारे लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस लेख में, हम गांजा और वर्चुअल रियलिटी के जटिल संबंध और विभिन्न चिकित्सकीय क्षेत्रों में संभावित चिकित्सकीय उपयोगों की संभावनाओं का अन्वेषण करेंगे।
वर्चुअल रियलिटी का विकास
VR ने अपने शुरुआती विचार से लेकर आज तक उल्लेखनीय रूप से तरक्की की है। शुरुआत में यह सिर्फ कुछ खास क्षेत्रों के लिए कल्पित था, लेकिन अब VR मनोरंजन, गेमिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों में फैल चुका है।
इसकी इमर्सिव क्षमताएं और हार्डवेयर व सॉफ़्टवेयर में आई तकनीकी छलांगों ने डिजिटल दुनिया व असल दुनिया की सीमाओं को धुंधला कर दिया है और उपयोगकर्ताओं के डिजिटल परिवेश से जुड़ाव के तरीके को बदल दिया है।
गांजा का सेवन: ट्रेंड्स और प्रभाव
फिलहाल, भांग संबंधी कानूनों में काफी बदलाव आए हैं, जिसका मुख्य कारण इसके संभावित चिकित्सकीय लाभों के प्रति बढ़ती जागरूकता है। मनोरंजनात्मक और औषधीय दोनों तरह के उपभोक्ताओं के कारण, भांग का उपयोग अब सामान्य हो गया है, जिसका श्रेय इसके प्रमुख साइकोएक्टिव यौगिकों, जैसे कि टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) और कैनाबिडियोल (CBD), और इनके मन व शरीर पर असर को जाता है।

भांग में पाए जाने वाले ये व अन्य यौगिक इंद्रिय संवेदना में बदलाव, संज्ञानात्मक वृद्धि, मूड में बदलाव, और शांति जैसी प्रभाव पैदा कर सकते हैं। हालांकि, दुनिया भर में भांग की कानूनी स्थिति के कारण, भांग पीते समय अनुभव कई चीजों जैसे सेवन का तरीका, सहनशीलता स्तर, वातावरण, किस्म की संरचना और डोज़ आदि पर निर्भर करता है।
वर्चुअल रियलिटी में गांजा और संवेदना
संवेदना के संदर्भ में गांजा और वर्चुअल रियलिटी की समानताएं एक बहुत रोचक शोध क्षेत्र है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कैनाबिनॉइड्स, विशेष रूप से THC और CBD, भावनात्मक नियंत्रण और इंद्रिय प्रसंस्करण से जुड़े न्यूरल पाथवे पर प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे वर्चुअल वातावरण की अनुभूति बदल सकती है या बेहतर हो सकती है।
हालांकि अभी ज्यादा शोध नहीं हुआ, लेकिन शुरुआत की स्टडीज़ और लोगों की अनुभवजन्य रिपोर्ट दर्शाती हैं कि वर्चुअल रियलिटी में उतरने से पहले गांजा सेवन करने से VR अनुभवों में जैसे उपस्थिति, डूबाव, स्थानिक सोच, और भावनात्मक जुड़ाव में सुधार देखे जा सकते हैं। ये प्रभाव इंद्रिय संवेदनशीलता, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं की तीव्रता, रचनात्मकता, और VR दुनिया में गहरे डूबाव के रूप में नजर आ सकते हैं।
नवीनतम वर्चुअल रियलिटी तकनीक ने शराब, निकोटिन और कोकीन के उपयोग विकार से जूझ रहे लोगों में भी क्यू रिस्पॉन्स को मापने में उल्लेखनीय प्रभाव दिखाया है।

इस अध्ययन का उद्देश्य क्यू-रिस्पॉन्स मूल्यांकन प्रणाली विकसित करना था, यह परिकल्पना करते हुए कि लोग उन VR परिवेशों में जिनमें भांग हो, वहां सामान्य VR की तुलना में ज्यादा क्रेविंग और ध्यान दिखाएंगे।
बीस भांग पीने वाले प्रतिभागियों ने VR परीक्षण में हिस्सा लिया, जिसमें उन्हें ऑडियो, विजुअल, घ्राण और वाइब्रोटैक्टाइल उत्तेजनाओं वाले विभिन्न वर्चुअल वातावरणों में रखा गया, इनमें से दो में भांग का सेवन और उससे जुड़ा परिदृश्य था। बाकी दो सामान्य VR सेटिंग्स थीं - एक डिजिटल आर्ट गैलरी और दूसरी प्राकृतिक दृश्यों वाली।
परिणामों में VR कैंनाबिस परिवेश में सामान्य VR की तुलना में तीव्र क्रेविंग और ध्यान दिखा, जिससे संकेत मिलता है कि VR तकनीक और भांग का मेल व्यसन शोध और उपचार रणनीतियों में सहायक हो सकता है।
हालांकि, अभी की कानूनी स्थिति और VR तकनीक की मौजूदा दशा के कारण इन घटनाओं के सटीक तंत्र को समझना मुश्किल है, और कैनाबिनॉइड्स व VR अनुभवों के बातचीत को समझने के लिए और शोध की आवश्यकता है।
गांजा के साथ VR का आनंद बढ़ाना
जो लोग रोजाना गांजा का सेवन करते हैं उनमें से उच्च प्रतिशत ने वर्चुअल रियलिटी तकनीक के साथ गांजा सेवन के बाद अनुभव को और शानदार बताया। अधिकांश यूजर्स के लिए गांजा और VR का मिलाजुला उपयोग इंद्रिय उत्तेजना और संज्ञानात्मक अन्वेषण का अनूठा मेल रहा, जिससे आनंद और नई अनुभूतियां मिलीं।

साथ ही, कुछ खास VR ऐप्स एवं गेम्स जिनमें इमर्सिव कहानी, नेत्रों को लुभाने वाले दृश्य या इंटरएक्टिव गेमप्ले हो, वे विशेष रूप से गांजा के साइकोएक्टिव प्रभावों को और भी खास बना सकते हैं, जिससे वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए संभावनाएं असीमित हैं।
चिकित्सकीय संभावना: गांजा-सहायित वर्चुअल रियलिटी
मनोरंजन से आगे बढ़कर, भांग और वर्चुअल रियलिटी का मेल विभिन्न चिकित्सकीय परिस्थितियों में एक विशेष चिकित्सकीय टूल बन सकता है, क्योंकि क्लिनिकल शोध इसके सम्मिलित प्रभावों द्वारा कई स्थितियों के लक्षणों को शांत करने की कोशिश कर रहा है। CUD (कैनाबिस उपयोग विकार) खासकर तब चुनौतीपूर्ण हो जाता है जब वह मनोविकृति या मूड डिसऑर्डर के साथ जोड़ा जाए, क्योंकि ऐसे मरीज इनमें और ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
अनेक प्रयासों के बावजूद, पारंपरिक मनोचिकित्सा अल्पकालिक सफलता दिखाती है, जिसे समय के साथ बनाए रखना मुश्किल होता है। VR टूल्स और वातावरणों का आना इलाज की सफलता के लिए आशाजनक है, लेकिन गांजा की कानूनी स्थिति के चलते CUD का इलाज फिलहाल कम है। नये दृष्टिकोण में वर्चुअल रियलिटी की मदद से मरीज के जीवन से जुड़े चरित्रों के अवतार बनाए जाते हैं, जिससे चिकित्सक और मरीज के बीच बेहतर इंटरएक्शन होता है। इमर्सिव VR सत्रों में, मरीज आत्म-सम्मान, इमोशनल रेगुलेशन, तनाव प्रबंधन, मुकाबला रणनीति, और मोटिवेशन की स्किल्स विकसित कर सकते हैं।

2022 में किए गए शोध में 40 प्रतिभागियों (उम्र +18) को शामिल किया गया, जिन्हें औसत या गंभीर कैनाबिस उपयोग विकार के साथ-साथ मनोविकृति और/या मूड विकार का अनुभव हो रहा था। अध्ययन में आठ साप्ताहिक एक-एक घंटे के सत्र थे, जिनमें चिकित्सकीय इंटरव्यू, गांजा उपयोग की गंभीरता का मूल्यांकन (CUPIT टेस्ट) एवं मूत्र THC सांद्रता की जांच शामिल थी, साथ ही 3, 6 व 12 माह के फॉलो-अप किए गए।
नवंबर 2022 तक प्रतिभागियों ने गांजा सेवन और CUD की गंभीरता में औसत कमी दिखाई, और फॉलो-अप में यह कमी बरकरार रही, वहीं जीवन की गुणवत्ता में सुधार व मनोविकृति के लक्षणों में कमी आ गई। ये सार्थक परिणाम बताते हैं कि CUD के शिकार लोगों के लिए यह एक प्रभावी चिकित्सकीय टूल बन सकता है।
चिंता विकार, PTSD (पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर), पुराना दर्द प्रबंधन या सुभोजन विकार जैसी स्थितियों में गांजा-सहायित VR नई राहत व चिकित्सा दे सकता है। वर्चुअल रियलिटी की इमर्सिव प्रकृति और गांजा के तनाव-निवारक, दर्द-निवारक और मूड-संतुलन गुणों को मिलाकर, चिकित्सक इलाज को ज्यादा प्रभावी व मरीजों का कल्याण बेहतर करने की कोशिश कर सकते हैं। SUD (संज्ञा-उपयोग विकार) और व्यवहारिक व्यसनों के इलाज हेतु VR तकनीक शोधकर्ताओं को इन स्थितियों के मूल्यांकन और इलाज में मदद कर सकती है।

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि HMDs (हेड-माउंटेड डिवाइसेज) व्यसन की पहचान और इलाज में मदद कर सकते हैं। मार्च 2019 तक प्रकाशित 37 शोध-पत्रों की समीक्षा में इन्हें दो समूहों में बांटा गया - एक क्यू-रिस्पॉन्स पर केंद्रित और दूसरा हस्तक्षेप पर। समीक्षा बताती है कि VR वाकई मूल्यांकन और इलाज दोनों में उपयोगी हो सकता है।
विचारणाएँ और चिंताएँ
इन सभी बातों के बावजूद, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि गांजा और VR का संयोजन और एकीकरण अभी भी एक वास्तविकता बनने से दूर है, क्योंकि अभी भी संभावित जोखिमों, दुष्प्रभावों और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर और शोध की ज़रूरत है।
साथ ही, भांग से जुड़े कानूनी मुद्दे और निर्भरता या दुरुपयोग की संभावना, इस तरह के शोध को रोके हुए हैं।
निष्कर्ष
VR और गांजा सेवन का मेल मनोरंजन से लेकर चिकित्सकीय नवाचार तक अद्भुत संभावनाएं प्रस्तुत करता है। हालांकि जन-मान्यताओं में उज्ज्वल भविष्य दिखता है, लेकिन इसे हकीकत बनाने के लिए और वैज्ञानिक शोध जरूरी है।
जैसे जैसे क्षेत्र विकसित होगा, गांजा और VR के संयोजन को सतर्कता से अपनाना जरूरी है, ताकि संभावित जोखिम नियंत्रित किए जा सकें। शोध, संवाद और जिम्मेदार उपयोग से हम आशा करते हैं कि गांजा-सहायित VR मनोरंजन, खोज और उपचार का उपयोगी टूल बनेगा।
बाहरी संसाधन
1. वर्चुअल रियलिटी-बेस्ड डिजिटल ट्विन्स: फार्मास्युटिकल गांजा पर केस स्टडी
2. वर्चुअल रियलिटी परिवेशों में गांजा संकेतों की प्रतिक्रिया
4. मनोविकृति और मूड विकार वाले मरीजों में CUD के लिए अवतार हस्तक्षेप
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