स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो कैनबिस स्ट्रेन सप्ताह-दर-सप्ताह गाइड
- 1. ग्रो स्पेसिफिकेशंस
- 2. ग्रो सेटअप
- 3. अंकुरण और सीडलिंग स्टेज | सप्ताह 1
- 4. प्रारंभिक वेज | सप्ताह 2
- 5. मिड वेज | सप्ताह 3-4
- 6. ट्रांजिशन (प्री-फ्लावर) | सप्ताह 5
- 7. प्रारंभिक फ्लावर | सप्ताह 6-7
- 8. मिड फ्लावर (बल्क फेज) | सप्ताह 8-9
- 9. पकना और हार्वेस्ट | सप्ताह 10 (और उसके आगे)
- 10. यील्ड और स्मोक रिपोर्ट
- 11. निष्कर्ष
स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो उगाने वालों और स्मोक करने वालों दोनों के लिए एक लुभावना आनंद है। उगाने वालों के लिए, इसमें तेज़ बढ़त, प्रभावशाली उत्पादन क्षमता और मजबूत संरचना है, जो छोटी-छोटी गलतियों को भी माफ कर देती है। लेकिन असली आकर्षण इसके रेज़िन-समृद्ध, ट्राइकोम से ढके कली हैं जो केक पर जमी बर्फ की तरह चमकते हैं और मीठे गोट चीज़, पुरानी मिट्टी की स्कंक और स्ट्रॉबेरी हैश व जंगली बेरीज़ की हल्की सुगंध बिखेरते हैं। स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो एक जरूर आजमाने वाली स्ट्रेन है, जो कैनाबिस प्रेमियों के लिए अनूठा और स्वादिष्ट अनुभव देती है।
आपकी यात्रा को सफल और उच्च गुणवत्ता वाली फसल तक पहुँचाने के लिए, हमने यह सप्ताह-दर-सप्ताह ग्रोइंग गाइड तैयार की है, जिसमें बीज से हार्वेस्ट तक का टाइमलाइन, ग्रोथ के विभिन्न स्टेज की जानकारी और स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो के सबसे बेहतरीन परिणाम पाने के टिप्स शामिल हैं।
1. ग्रो स्पेसिफिकेशंस
स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो एक फेमिनाइज़्ड कैनबिस स्ट्रेन है, जिसकी शानदार जेनेटिक्स में स्ट्रॉबेरी पाई, अफगान OG और BF सुपर ऑटो #1 शामिल हैं। इस पौधे की 25% सैटिवा और 75% इंडिका संरचना इसे ठंडे से लेकर गर्म और समशीतोष्ण (टेम्परेट) क्लाइमेट तक उपयुक्त बनाती है। इस स्ट्रेन की सबसे खास बात है इसका ऑटोफ्लावरिंग नेचर, जिससे केवल 75-80 दिन में बीज से तुड़ाई हो जाती है।
जब बात इनडोर कल्टीवेशन की आती है, तो इसकी ऊंचाई लगभग 100 सेमी तक सीमित रहती है, जो छोटे स्थानों के लिए उपयुक्त है। इनडोर, आप 650 ग्राम प्रति वर्ग मीटर तक भरपूर यील्ड की उम्मीद कर सकते हैं। आउटडोर में, स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो 140 सेमी तक ऊंची हो सकती है, और आउटडोर यील्ड भी इनडोर जैसी ही रहती है।

जहां तक बात है स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो के स्वाद व खुशबू की, तो आप मिट्टी, स्ट्रॉबेरी और चीज़केक फ्लेवर से चौंक जाएंगे। स्ट्रॉबेरी हैश और चीज़केक की सुगंध इस ऑटोफ्लावर के अनुभव को और खास बना देती है। यह उन कैनाबिस प्रेमियों के लिए एक बेहद रोचक स्ट्रेन है, जो कुछ नया और स्वादिष्ट आज़माना चाहते हैं।
2. ग्रो सेटअप
ऑनलाइन उपलब्ध कुछ ही स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो ग्रो डायरीज़ इनडोर इसकी काबिलियत को दिखाने के लिए काफी हैं। हमने ‘Further’ नामक ग्रोअर की रिपोर्ट चुनी है, जिसे सप्ताह-दर-सप्ताह फॉलो करते हुए उसके पर्यावरण और यील्ड की जानकारी दी है। साथ ही, हमने कुछ दूसरी डायरीज़ से भी फोटोज़ लिए हैं ताकि बीज से हार्वेस्ट तक इस स्ट्रेन के ग्रोथ को बेहतर समझा जा सके और इसकी स्थिरता देखी जा सके। नीचे दिए गए हैं Further के सेटअप और एनवायरमेंट के डाटा।
| ग्रो स्पेस: | 2.25 m2 (21.53 ft2) | पॉट साइज़: | 15 l (3.96 gal) |
|---|---|---|---|
| बीज से हार्वेस्ट: | 11 सप्ताह | मीडियम: | कोको/पर्लाइट |
| फ्लावरिंग: | 6 सप्ताह | पोषक तत्व: | सिंथेटिक/ऑर्गेनिक |
| लाइट साइकल: | 24/0 | pH स्तर: | 6.0-6.3 |
| लाइट टाइप: | LED | दिन का तापमान: | 24°C (75°F) |
| वॉट्स इस्तेमाल किए गए: | 600 | ह्यूमिडिटी: | 40-50% |
बिल्कुल स्पष्ट है कि स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो इतनी ही बहुपर्यायी है जितनी किसी भी आधुनिक ऑटोफ्लावर को होना चाहिए। इस पौधे के साथ शानदार परिणाम पाने के लिए आपको ऊपर दी गई परिस्थितियों की नकल करने की जरूरत नहीं। यह अलग-अलग सिस्टम्स और एनवायरनमेंट, यहां तक कि आउटडोर कल्टीवेशन में भी, अच्छी तरह पनपती है।
3. अंकुरण और सीडलिंग स्टेज | सप्ताह 1
किसी भी अनुभवी ग्रोअर से पूछिए, वे कहेंगे कि आपके इनडोर गार्डन के लिए निरंतर और अनुकूल वातावरण बनाना सबसे जरूरी है। यह खासकर ऑटोफ्लावरिंग किस्मों, जैसे स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो, के लिए लागू होता है। इनका ग्रो साइकल बहुत कम है और हर दिन कीमती है। शुरू के कुछ दिनों में, गर्म और नम परिस्थितियां बनाना जरूरी है ताकि आपकी छोटी और कमजोर सीडलिंग पर अतिरिक्त तनाव न पड़े। हम कहेंगे कि नीचे दी गई तालिका के कुछ पैरामीटर सामान्य से कम हैं। तापमान लगभग 26-28 डिग्री और सापेक्षिक आर्द्रता (रिलेटिव ह्यूमिडिटी) भी अधिक रखें – लगभग 80% तक।
| पौधे की ऊंचाई: | 3 सेमी | ह्यूमिडिटी: | 40% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 80 सेमी | प्रतिदिन पानी: | 0.5 लीटर |
| दिन का तापमान: | 24°F (75°C) | pH: | 6.0 |
| रात का तापमान: | N/A | खुशबू: | कोई नहीं |
अच्छा सिड मैटीरियल अंकुरण में कोई समस्या नहीं देगा। प्रतिष्ठित निर्माता के स्वस्थ बीज, गर्म, नम और अंधेरे वातावरण में रखने के 1-2 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं। कैनाबिस सीड्स के अंकुरण का सबसे आसान तरीका है इन्हें गीले पेपर टॉवल के बीच रखना।
कुछ बागवान अपने बीज को पानी के गिलास में पहले भिगोते भी हैं। आप उन्हें 12 घंटे तक भिगोकर रख सकते हैं या तब तक सतह पर तैरने दें जब तक बीज फट जाए और टैप्रूट बाहर न दिख जाए।

गीले पेपर टॉवल वाला तरीका बहुत सुविधाजनक है क्योंकि इसमें आप अपने बीज की प्रगति लगातार देख सकते हैं। जब बीज फट जाए और टैप्रूट दिख जाए, तो तुरंत न लगाएं। टैप्रूट को लगभग 1 सेमी (0.5 इंच) लंबा होने दें तो सीडलिंग मजबूत बनेगी।

अंकुरित बीज को मिट्टी में रखने के बाद तुरंत लाइट चालू करने की जरूरत नहीं है। जब तक पौधा मिट्टी से बाहर न आ जाए, वह अंधेरे में रह सकता है। जैसे ही पौधा बाहर आए, लाइट चालू करें। लाइट बहुत करीब न रखें, वरना पौधा जल सकता है।
साथ ही, हाई रिलेटिव ह्यूमिडिटी पर ध्यान दें, नहीं तो पौधा अपनी अविकसित जड़ों से अधिक पानी खो बैठेगा। अगर आप ग्रो रूम में पर्याप्त ह्यूमिडिटी न बना सकें, तो ह्यूमिडिटी डोम इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस ग्रोअर ने अपने स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो के शुरुआती सप्ताहों के लिए छोटा स्टार्टर पॉट इस्तेमाल किया। ऑटोफ्लावर के लिए यह सुरक्षित तरीका है क्योंकि कई बार पौधे ट्रांसप्लांटिंग सहन नहीं कर पाते। साथ ही छोटे पॉट में पानी देना आसान रहता है। लगभग 50 mL प्रतिदिन काफी है। जब सीडलिंग मजबूत हो जाए, आप इसे बड़े पॉट में ट्रांसप्लांट कर सकते हैं।

4. प्रारंभिक वेज | सप्ताह 2
सप्ताह 2 पर्यावरण की दृष्टि से सप्ताह 1 जैसा ही है। तापमान दिन में 26-28 डिग्री और रात में 5 डिग्री कम रखें। ह्यूमिडिटी भी 70-80% तक रखें। अब आपका पौधा थोड़ा कठोर हो गया है, लेकिन कोशिश करें कि उसे शुरुआत में सर्वश्रेष्ठ वातावरण मिल जाए।
| पौधे की ऊंचाई: | 5 सेमी | ह्यूमिडिटी: | 40% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 80 सेमी | प्रतिदिन पानी: | 0.5 लीटर |
| दिन का तापमान: | 24°F (75°C) | pH: | 6.0 |
| रात का तापमान: | N/A | खुशबू: | कोई नहीं |
बीज बोने के दूसरे सप्ताह से पौधे की विकास गति तेज़ हो जाती है। आपको जोड़ी के असली पत्ते और भी बड़े होते दिखेंगे। जैसे ही नई जोड़ी पुरानी से बड़ी हो, इसका मतलब है कि ऑटोफ्लावर बहुत अच्छा कर रहा है। नोड्स पर छोटे हरे उभार भी दिख सकते हैं, जो आगे चलकर साइड ब्रांच बनेंगे।

हम पहले ही ट्रांसप्लांटिंग और उसकी सावधानियों का ज़िक्र कर चुके हैं। अगर आप देख रहे हैं कि पौधे के पत्ते छोटे पॉट के बाहर तक जा रहे हैं, तो तुरंत ट्रांसप्लांट कर दें। वरना जड़ें पॉट की दीवारों के किनारे-किनारे उगना शुरू कर देंगी और पौधा root bound हो सकता है।

अगर आप ऑटोफ्लावर सीधे आखिरी पॉट में लगाते हैं, तो आपको शुरू के कुछ हफ्तों तक अतिरिक्त न्यूट्रिएंट देने की जरूरत नहीं। मिट्टी में आमतौर पर पर्याप्त खाद मौजूद होती है। लेकिन अगर आपका मीडियम कोको कॉयर या हाइड्रोपोनिक्स है, तो हर बार पानी देते समय पौधों को न्यूट्रिएंट दें। नीचे ग्राफिक में स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो के वेजेटेटिव फेज के लिए न्यूट्रिएंट शेड्यूल दिखाया है।

मार्केट में आज कई तरह की न्यूट्रिएंट लाइन उपलब्ध हैं, आप कोई भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान दें कि वेजेटेटिव फेज के लिए आपकी बोतल में नाइट्रोजन (N) फॉस्फोरस (P) व पोटैशियम (K) से अधिक हो, फूल के लिए इनका अनुपात उल्टा होना चाहिए।
5. मिड वेज | सप्ताह 3-4
सप्ताह 3 और 4 में सक्रिय वेजेटेटिव ग्रोथ शुरू होते ही, आपको आदर्श स्थितियों को लेकर ज़्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं। इस समय पौधा मज़बूत और लचीला हो चुका है। आप तापमान घटाकर लगभग 25°C पर रख सकते हैं, और ह्यूमिडिटी 40-60% बनी रहे, अभी 60% के आसपास रहे तो बेहतर।
| पौधे की ऊंचाई: | 10-15 सेमी | ह्यूमिडिटी: | 40% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 80 सेमी | प्रतिदिन पानी: | 0.5-5 लीटर |
| दिन का तापमान: | 24°F (75°C) | pH: | 6.0 |
| रात का तापमान: | N/A | खुशबू: | कोई नहीं - हल्की |
अगर पहले आपको अपने पौधों की धीमी विकास को लेकर चिंता थी तो अब वह खत्म हो जाएगी; अब आपके ऑटोफ्लावर में रोज़ नए पत्ते और साइड ब्रांच तेजी से उगने लगेंगे। इसी दौरान समझदार ग्रोअर पौधे के भविष्य के आकार को ध्यान में रखकर ट्रेनिंग शुरू करते हैं। दुर्भाग्य से हमारे पास स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो की ट्रेनिंग की तस्वीरें नहीं हैं, क्योंकि ज्यादातर लोगों ने इसे प्राकृतिक अवस्था में ही बढ़ने दिया।

ट्रेनिंग दोधारी तलवार है। एक ओर, आप सीमित जगह में पौधे को छोटा रख सकते हैं, लेकिन यह पौधे के लिए तनावपूर्ण भी है। ऑटोफ्लावर के लिए सिर्फ लो-स्ट्रेस ट्रेनिंग (LST) तकनीक, जैसे टाई-डाउन, का ही उपयोग करें, जब तक अनुभव न हो। आपका अनुभव बढ़े तो हाई-स्ट्रेस ट्रेनिंग (HST) की तरफ बढ़ सकते हैं, जैसे टॉपिंग और फिम्मिंग या सुपर क्रॉपिंग।

6. ट्रांजिशन (प्री-फ्लावर) | सप्ताह 5
जैसे-जैसे आपका ऑटोफ्लावर बड़ा होता जाता है, वह ज़्यादा लाइट झेल सकता है। या तो पौधा अपने आप लाइट के नजदीक पहुंचता है, या आप LED डिमेबल क्वांटम बोर्ड की शक्ति बढ़ा सकते हैं या लाइट को और करीब ला सकते हैं। आप दिन का तापमान थोड़ा घटाना चाहेंगे और अगली स्टेज में जैसे-जैसे फ्लावरिंग बढ़े, तापमान और ह्यूमिडिटी घटाते जाएं।
| पौधे की ऊंचाई: | 38 सेमी | ह्यूमिडिटी: | 40% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 80 सेमी | प्रतिदिन पानी: | 5 लीटर |
| दिन का तापमान: | 24°F (75°C) | pH: | 6.0 |
| रात का तापमान: | N/A | खुशबू: | हल्की |
वेजेटेटिव ग्रोथ से बडिंग का ट्रांजिशन पौधे के बीच के नोड्स से शुरू होता है, और ज़रा ध्यान से देखेंगे तो वहीं नरम सफेद फीमेल हेयर, पिस्टिल, दिखाई देंगे जहां पत्ती की डंडी तने से जुड़ती है। कुछ ही दिनों में सबसे ऊपर भी पिस्टिल दिखाई देंगे। इसी समय यहां की नई पत्तियां अपनी शक्ल और रंग बदल लेती हैं – ज्यादा पीली, पतली, कभी-कभी मुड़ी हुई। कई बार तो ये पिस्टिल से अलग ही नहीं दिखतीं।

इसी के साथ शुरू होता है फ्लावरिंग स्ट्रेच - जब मुख्य तना और साइड ब्रांच लंबी होने लगती हैं। कुछ पौधे इस दौर में अपनी ऊंचाई 50% से 150% तक बढ़ा लेते हैं। आमतौर पर ऑटोफ्लावर छोटे रहते हैं, इसलिए इनमें यह समस्या नहीं आती। जबकि फोटोपीरियड किस्मों में ऊंचाई जल्दी नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
इस समस्या को दूर करने के लिए आपको समय पर फ्लावरिंग शुरू करनी चाहिए और ट्रेंनिंग तकनीकें अपनानी चाहिए ताकि पौधा छोटा और सुंदर रहे। हमारी गाइड में आगे दिखेगा कि स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो में ट्रेनिंग की जाती तो फायदा होता, क्योंकि इसकी मुख्य कोला लंबी और साइड ब्रांच भी बड़ी बनती हैं।

7. प्रारंभिक फ्लावर | सप्ताह 6-7
हमारे सप्ताह-दर-सप्ताह तालिकाओं को देखें तो आप पाएंगे कि हमने नाइट टेम्परेचर नहीं दिया, क्योंकि ग्रोअर ने स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो को 24/0 शेड्यूल पर उगाया – यानी रात को लाइट बंद नहीं की। तस्वीरों से साफ़ है कि यह ऑटोफ्लावर समय पर बडिंग करने और बड़ी घनी कलियां बनाने में सफल रहा।
| पौधे की ऊंचाई: | 62-95 सेमी | ह्यूमिडिटी: | 40% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 20 सेमी | प्रतिदिन पानी: | 5 लीटर |
| दिन का तापमान: | 24°F (75°C) | pH: | 6.3 |
| रात का तापमान: | N/A | TDS: | 600 ppm |
शाखाओं के बढ़ते ही शुरुआती फ्लावर में नोड्स पर कलियां उगने लगती हैं। यह अभी छोटी दिखती हैं, लेकिन समय के साथ मिलकर लंबी, निरंतर कोलाज़ बना लेंगी, जैसी हम आज के ऑटोफ्लावर में देख सकते हैं।

पिस्टिल अभी सफेद हैं, लेकिन फलों के चारों ओर के पत्तों पर पहले ट्राइकोम्स नजर आने लगते हैं। यह रेज़िन ग्रंथि टेर्पेन्स से भरपूर होती हैं, जिनकी खुशबू आपके पौधे की महक बढ़ा देती है। अधिकतर ग्रोअर एयर को साफ़ करने के लिए कार्बन फिल्टर लगाते हैं, आपको भी यही सलाह है।

जैसा बताया, फ्लावरिंग के समय पौधों को एक अलग मैक्रीएन्यूट्रिएंट सेट की जरूरत होती है। अब नाइट्रोजन ज़्यादा जरूरी नहीं और फॉस्फोरस व पोटैशियम को प्रमुखता देनी चाहिए। नीचे ग्राफिक में इस ग्रो के लिए सटीक फ्लावरिंग फीडिंग शेड्यूल को दिखाया है।

अगर आप पौधों को पर्याप्त रोशनी, पोषक तत्व और सही मात्रा में पानी देंगे तो वे खूब फलेंगें-फूलेंगे और उनकी कलियां ठोस व चमकदार दिखेंगी।

8. मिड फ्लावर (बल्क फेज) | सप्ताह 8-9
जब कलियां भरने लगती हैं तो पर्याप्त वेंटिलेशन और एक्स्ट्रा नमी निकालना अति आवश्यक हो जाता है, खासकर अगर आप गर्म, नम वातावरण में रहते हैं। वरना कली में मोल्ड या बड रॉट जैसी समस्याएं हो सकती हैं, साथ ही पाउडरी मिल्ड्यू भी आम है।
| पौधे की ऊंचाई: | 100-105 सेमी | ह्यूमिडिटी: | 50% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 20 सेमी | प्रतिदिन पानी: | 10 लीटर |
| दिन का तापमान: | 24°F (75°C) | pH: | 6.3 |
| रात का तापमान: | N/A | TDS: | 700 ppm |
फूल आने के 3-4 हफ्ते बाद पौधे को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती, लेकिन नियमित पानी और खाना चाहिए। मिट्टी में उगाते हैं तो 1-2 दिन में एक बार, कभी-कभी रोज़ पानी दें।
ग्रोअर ने कोको कॉयर मीडियम चुना, इसमें दिन में कई बार पानी देना पड़ता है। बार-बार मैन्युअल पानी देना असुविधाजनक हो सकता है, इसलिए ऑटोमैटिक ड्रिप सिस्टम बेहतर रहेगा।

जैसा ऊपर तस्वीर में दिख रहा है, स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो लंबी हुई और इसका मुख्य तना बाकी शाखाओं से काफी ऊपर निकला। अगर आपके लाइट शक्तिशाली है तो हर कली को पर्याप्त रोशनी मिलेगी, लेकिन सही ट्रेनिंग होती तो तने बराबरी पर होते।

आमतौर पर फ्लावरिंग का स्ट्रेच सप्ताह 7 या 8 पर खत्म हो जाता है, लेकिन स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो ने कुछ रिपोर्ट्स में सप्ताह 9 तक स्ट्रेच किया। इसे याद रखें, यह ऑटोफ्लावर काफ़ी लंबा हो सकता है।

अगर पौधा अपने खाने, पानी, लाइट और बाकी कंडीशनों से संतुष्ट रहा तो उसके बड्स मज़बूत और ठोस होंगे। पकने का सबसे साफ संकेत है बड के पिस्टिल का सूखना और पत्तों का फीका पड़ना।

9. पकना और हार्वेस्ट | सप्ताह 10 (और उसके आगे)
हार्वेस्ट से पिछले हफ्तों में आदर्श कंडीशन बनाए रखना बहुत जरूरी हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे पहले सप्ताह में। उस समय सीडलिंग कमजोर थी, अब यह जरूरी है कि बड्स पर फंगस न लगे। साथ ही, अधिक तापमान होने से THC और बाकी कैनाबिनोइड्स की मात्रा बड्स में कम हो सकती है।
| पौधे की ऊंचाई: | 110 सेमी | ह्यूमिडिटी: | 50% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 15 सेमी | प्रतिदिन पानी: | 10 लीटर |
| दिन का तापमान: | 24°F (75°C) | pH: | 6.3 |
| रात का तापमान: | N/A | TDS: | 700 ppm |
अपने कैनाबिस पौधे की हार्वेस्ट का सही समय तय करना इतना सीधा नहीं। जल्दी बाजी में आमतौर पर ग्रोअर पौधा काट लेते हैं जब फूल बढ़ना बंद कर देते हैं, जो सही तरीका नहीं है। बड्स का आकार स्थिर हो जाता है, लेकिन उनमें घनत्व और भार बढ़ता रहता है।
अनुभवी ग्रोअर पिस्टिल के रंग को देखते हैं। ज्यादातर स्ट्रेनों में हल्के हरे या सफेद रंग की पिस्टिल का मतलब है बड्स मैच्योर नहीं। लेकिन कई स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो ग्रो में देखा गया कि पौधे आखिरी तक सफेद पिस्टिल बनाते रहे।

इस वजह से सबसे पक्का तरीका है हार्वेस्ट विंडो जानने का – हैंड माइक्रोस्कोप/ज्वेलर की लूप ख़रीदें और जैसे ही प्लांट हार्वेस्ट के करीब लगे, रोज़ाना ट्राइकोम्स का रंग देखें। साफ़ ट्राइकोम्स मतलब अपरिपक्वता। जब ये बादली हों तो THC, बाकी कैनाबिनोइड्स और टेर्पेन्स अपनी अधिकतम मात्रा में हैं। तभी काटेंगे तो सबसे पोटेंट और फ्लेवरफुल फूल मिलेंगे।

एक और जरूरी चीज़: हार्वेस्ट से 1-2 हफ्ते पहले फ्लशिंग शुरू करें। बहुत पानी न भी दें, लेकिन खाद देना बंद करें। इससे मीडियम और पौधे से बचा हुआ नमक निकल जाएगा और स्मोक अधिक स्वास्थ्यवर्धक व स्वादिष्ट बन जाएगा।
धीरे-धीरे सुखाना और क्योरिंग कम से कम 2-3 हफ्तों तक बहुत जरूरी है। इससे घास जैसी महक और स्वाद खत्म होगा और असली फ्लेवर उभर कर आएगा। धीरे-धीरे सुखाने और क्योर करने से पोटेंसी भी बढ़ेगी।
10. यील्ड और स्मोक रिपोर्ट
यद्यपि पहली नज़र में जिस आंगन में स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो पौधा उगा, वह बहुत बड़ा और घना नहीं लगा, लेकिन इसने 150 ग्राम (5.29 औंस) उत्कृष्ट बड दिया। और भी ग्रो में आंकड़े इतने ही शानदार थे।

स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो की समीक्षाएं इसकी पोटेंसी और अद्वितीय प्रभाव को लगातार उजागर करती हैं। स्मोकर्स ने इसकी खुशबू और स्वाद को फलियों के नोट्स (आम, संतरा, स्ट्रॉबेरी) और चीज़केक के संकेत के रूप में बताया है।
प्रभाव के लिहाज से, यह स्ट्रेन अलग-अलग समय और मौके के लिए उपयुक्त लगती है। यह एक यूफोरिक और अपलिफ्टिंग सैटिवा प्रभाव से शुरू होती है, जो शाम के लिए अच्छी है। हालांकि, समय के साथ इंडिका प्रभाव प्रमुख हो जाता है और लंबा, गहरा रिलैक्सेशन देता है।
बिल्कुल शाम के लिए उपयुक्त है। अफगान और चीज़ से घंटे भर यूफोरिया होगा, फिर जबरदस्त स्टोन इफेक्ट। कुल मिलाकर 2-3 घंटे तक रहता है।
Further
11. निष्कर्ष
कई ग्रो रिपोर्ट्स से यही दिखता है कि स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो पौधे वेज में तो जबरदस्त बढ़ते हैं, लेकिन कद में छोटे और सघन रहते हैं। लेकिन फूल लगते ही यह स्ट्रेच करते हैं और आखिर में काफ़ी ऊंचे हो जाते हैं। इनकी संरचना काफी हद तक एक समान रहती है - साइड ब्रांचें ज्यादा नहीं बढ़तीं और सेंट्रल कोला सबसे ऊंची रहती है।
केवल कुछ ग्रोअर ही ट्रेंनिंग करते दिखे, बाकी ने ऑटोफ्लावर को प्राकृतिक रूप में बढ़ने दिया, जो हमारी नज़र में चूक थी। अगर इन्हें ट्रेंनिंग दी जाती तो संरचना सुधरती, लाइट्स का बेहतर उपयोग होता और यील्ड पर भी असर पड़ता।
एक और बात यह है कि स्ट्रॉबेरी चीज़केक की परिपक्वता का अंदाजा पिस्टिल के रंग से लगाना लगभग नामुमकिन है; ये अंत तक सफेद रहते हैं और कली कच्ची सी दिखती है, जबकि वह हार्वेस्ट के लिए तैयार होती है। इसे ध्यान में रखें और हार्वेस्ट टाइम तय करने के लिए हमेशा हैंड माइक्रोस्कोप का प्रयोग करें। बाकी स्ट्रॉबेरी चीज़केक ऑटो बहुत आसान और कम देखभाल वाला पौधा है तथा शुरुआती ग्रोअर को भी कोई दिक्कत नहीं होगी। खुशहाल ग्रोइंग, सबको!
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